Sunday, 3 March 2013

श्री कल्ला राठोड जय , जय जय कृपा निधान !जयति जयति जन वरद ,परभू करहु जगत कल्याण !!
जयति जयति जय जय रणधीर ! कारज सुखद वीर गंभीरा !जय कल्ला जय विप्पति निहन्ता ! जय जन मंगल जय बलवंता !! १ !!



गढ़ चित्तौड भवन बल धेर्यो ! दिल्ली पति अनुशासन प्रेयो !युद्ध निति संरक्षण हेतु ! पहुचे विपिन उदय सुनि सेतु !!२!!



पग पग भारत हाहाकारा ! कुटिल चतुर्दिक अत्याचारा !मत उन्मत भये रिपु भारी ! जंह तंह विकल सकल नर नारी !!3!!



बाह्य सुधोपन सुमधुर अकबर ! अंत कुटिल कठोर भयंकर !



कुल गरिमा क्षत्रिय नर भूले ! पद लोलुप लम्पट सुख फुले !!४!!



एक और संघर्ष कठोरा ! भय , आंतक उपद्रव घोरा !



छिन छिन समर मरण त्यौहारा ! जौहर ज्वाला जंग जुन्झारा !!५!!



दूजी और प्रशासन सेवा ! सुर दुर्लभ सुख मादक मेवा !मानहीन वैभव अधिकारा ! विघटित जीवन पतन अपारा!!६!!



मेघपाट महू रघुपति रीती ! कुल कर्म कीर्ति आचरण नीति !राणा वंश मान को भूखो ! भूतल विमल देव तरु रुंखो !!७!!



जय जय देव भूमि मेंवाडा ! जंह श्रुति धर्म सनातन बाधा !कुल रवि बाप्पा सतत ननामी ! युग पौरुष युग गौरव स्वामी !!८!!



जयमल कल्ला विप्लव रूपा ! रण तांडव पटु रूद्र अनूपा !फत्ता फतहसिंह रण बांका ! समर बिच मुंख केहू न तांका !!९!!



उदयसिंह के त्रय रण थम्भा ! प्राण प्रतिपल चरित नीर दंभा !आरी मद मथन कराल कृपाना ! करतल कलित मृत्यु सोपाना !!१०!!



शुर वीर गण गरजन लागे ! रण कातर चाहु दिशी कहू भागे !राजपूत रण कौतुक देखि ! कथी चमू अहि कंपिन भेगी !!११!!



यवन हताश भये बल हीना ! निरत मोह मद छद्म प्रवीणा ! गिरी चित्तौड भग्न प्रचीरा ! संधात शिल्प विशारद वीरा !!१२!!



बंचक अकबर गोली दांगी ! जयमल चरण कमल महू लागी !रण कंठीरव भयहु अपंग ! जयमल गौरव गंग तरंगा !!१३!!



देखि वीरवर मनसि विकार ! बोलेहु तव सुभ वचन उदारा !तुम पितु अनुज पूज्य पुनि मेरे ! किमी कतराना रण पटु तेरे!!१४!!



होऊ तात ! मम भुज आसीना ! करहु घोर पुनि परलय अधिना !भुज सिंहासन अर्पित आगे ! विस्मय कुलिशहू बिलखन लागे !!१५!!



बैठे जयमल बाहू विशाला ! राष्ट्र उग्र भट कल कराला !दोउ नरवीर लड़न तब लागे ! जुन मसान भैरव गण जागे !!१६!!



करतल चारि चारि कारवाला ! कटी कटी गिरत अरतिकपाला !कछु शरणागत कछु कर जोरे ! रक्त विरंजित दल तजि दौरे !!१७!!



कीन्ह दुरिते असि संधाता ! कोउ यवनाधम क्षुद्र अयाना !जय्मल्ला हिल्खी रण प्रत्युहा ! कुंठित आपण मलेच्छ समुहा !!१८!!



जयमल सहसा स्वर्ग सिधाए ! भये अरतिने जनु मनु भाये !निमिष शोक करी कल्ल महंता ! भये युद्ध रत वीर तुरंता !! १९!!



घमासान रण देखी बहोरी ! जरी यवन उर संशय होरी !करत कलोल चक्र राजपूती ! विपद ग्रस्त भई यवन विभूति !!२०!!



त्राहि त्राहि हा ! अल्ला ! अल्ला ! रखो प्राण दयाधन कल्ला !दिग दिगंत व्यपेऊ यह घोषा ! राजपूती मन लदत सरोषा !!२१!!



जिन तिन पीर माजर पिगम्बर ! यवन मनावत कम्पित कातर !चकित थकित अरी दल सेनानी ! पल पल विकल दूर रजधानी !!२२!!



तकि तनी टंकी कपट किर्पना ! किंह प्रकार धूर्त अस आना !धरा गोद थिरकेहू रण मुंडा ! जनु जग प्रबल वीर रस कुंडा !!२३!!



कल्ला ! ओज रुण्ड तब जाग्यो ! खडग प्रहार करन पुनि लाग्यो !जित धायो तित संगर सुनो ! उमड्यो चाव पलक पल दुनो !!२४!!



लखी कबंध करी अद्भुत लीला ! तजत प्राण व्याकुल रण शीला !हनुमान अरु भैरव पोला ! जंह तंह नीरस यवन जन चोला !!२५!!



पुनि मलेच्छा जन मंत्र विचारी ! छोड़ी नील रंग पिचकारी !क्षत्रिय वर्चस भयो अशेषा ! मिट्यो यवन कुल कल कलेशा !!२६!!



वीर वधु श्रीकृष्ण कुमारी ! श्रीपद पावन प्राण दुलारी !



चढ़ी चिता पिय संग पुनीता ! पतिवर्ता निरत जटिल जम जीता !!२७!!



तत्त्व मिले पुनि मूल सवरूपा ! भूमि अंक कोउ अंक न भूपा !



भिन्न भिन्न पे करती कहानी ! आदर लाभ पतन पद हानी!!२८!!



मर्त्युन्जय जगतीतल कल्ला ! वीर शिरोमणि रण गढ़ मल्ला !



पञ्च शिरा पे भीम भुजंगा ! सकल लोक हित मंगल गंगा !!२९!!



तुम करूणानिधि आरती भजन ! भावुक भक्त सतत मन रंजत !



राजत खंडग चंडिका करनी ! देश नोंक प्रिय जन दुःख हरणी !!३०!!



देव शक्ति गण संग बिराजे ! सतत तेज अतुलित मन भाजे !



भक्तारय अरु विविध अपाया ! सुमिरत चरण हॉत निरुपाय !!३१!!



जन सुखदायक वरद अनंता ! जय जय कृष्ण कुंवरी केन्ता !



भुत,प्रेत ,बेताल पिशाचा ! पीटर दोष पुनि कालवा काचा !!३२!!



शांत होत सब तन मन पीरा ! कृपा चरण राज मलय सामीरा !



कल्पवृक्ष कानन तुम सुंदर ! जन वत्सल जन मंगल मंदर !!३३!!



जय रण वल्लभ जय राठौडा ! धरा धरेंद्र मुकुट मणि मौरा !



तुम बिन कौन सहायक मेरो ! चरण समीप दिन को डेरो!!३४!!



करउ अकेतु पद अभिषेकू ! तुम अवलम्ब जगन मह एकु !



करुना कलित चारू चित्त दीजे ! दुरिनल दलित को अपनों कीजे !!३५!!



जय जय कल्ला कलयुग देवा ! करहु कृपाधन विप्पति कलेवा !



कृपा कृपण कबहू न साईं ! नाम लेत अघ ओघ नसाही !!३६!!



आन्घन बंझान के सुर नरतही ! चारू चित्त चिंतन सब बरनहि !



रंक होत निधिनाथ कुबेरा! तजत कुबेर अराति घनेरा!!३७!!



कुटिया होई राज प्रसादा ! हरत कृपा तव दारुण बाधा !अंग विकार न रहहि कदापि ! जय जय केशर सिंह प्रतापी !!३८!!



दिग्गंधर्व कीर्ति रंग राचे ! भू संकेत नियति नटी नाचे !तव सम्मान को इत्तर कृपालु ! काठहु भाव भय भीषण जालु!!३९!!



कल्ला कल्ला उचरत जिव्हा ! नाम निरत मन चतुर पपीहा !चरण विलास विनय नित शिषा ! देहु आशीष आसिष आसिषा !!४०!!



दिन मनोरथ पुरहू तुम कल्ला गुणधाम !चार पदारथ चाकरी निश दिन करत ललाम !!


इति श्री कृपा चक्रवर्ती महावीर कल्ला चमत्कार चालीसा संम्पन्न !!